Posts

Showing posts with the label पंछी

Rooh ka ghar (रूह का घर)

Image
शाम हुई पंछी चले घर मेरी रूह ने कहा चल तू भी अपने घर एक पता ज़हन में था चला गया हर रोज़ की तरह मेरी रूह बोली ये कहाँ ले आया मैं उस से बोला यही तो है तेरा घर वो बोली मुझे जाना है मेरे घर तू ले आया जाने किधर मैं फिर बोला जो मेरा घर वही तो है तेरा घर वो बोली नहीं ! चल में बताती हूँ तुझे अपना घर मैं रहती हूँ वहां जहां प्यार की हो दस्तक और खुशियों की हो महक जहाँ की फिज़ा में सुकून हो और चैन की साँस हो जिंदगी सरसब्ज़ हो और मौत का न हो डर क्या ले चलेगा मुझे? मैं निरुत्तर था नहीं वाकिफ़ था ऐसे किसी पते से वो मन मसोस कर मेरे साथ ही आ गई और मैं ढूंढ रहा हूँ उस पते को आज भी ..........